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प्रेगनेंसी में पैरों में ऐंठन: कारण और उपाय

रात में पिंडली की मांसपेशियों में ऐंठन प्रेगनेंसी की आम साथी है। जानें इसके कारण, पैर की ऐंठन से तुरंत राहत कैसे पाएँ और इसे होने से कैसे रोकें।

Mama Ai टीम

अपडेट किया 27 जून 2026 7 मिनट पढ़ना
प्रेगनेंसी में पैरों में ऐंठन: कारण और उपाय

रात के बीचों-बीच पिंडली में तेज़ दर्द उठता है, मांसपेशी अकड़ कर पत्थर जैसी हो जाती है और आप घबराकर जाग उठती हैं—समझ ही नहीं आता कि हुआ क्या। प्रेगनेंसी में पैरों में ऐंठन (leg cramps) सबसे आम और सबसे तकलीफदेह दिक्कतों में से एक है, खासकर दूसरी और तीसरी तिमाही में। ज़्यादातर यह रात में होती है और सबसे ज़्यादा पिंडली (काफ़) की मांसपेशियों को पकड़ती है।

अच्छी बात यह है: आम तौर पर प्रेगनेंसी में होने वाली पैरों की ऐंठन दर्द भरी ज़रूर होती है, पर खतरनाक नहीं। इस लेख में हम पैरों में ऐंठन के कारण, ऐंठन के दौरान घर पर तुरंत क्या करें, रात में पैरों में ऐंठन को कैसे रोकें, और किन कुछ दुर्लभ मामलों में पिंडली का दर्द फौरन डॉक्टर को दिखाने की वजह बनता है—सब समझेंगे।

प्रेगनेंसी में पैरों में ऐंठन क्यों होती है: कारण

सच कहें तो—प्रेगनेंसी में पैरों में ऐंठन का सटीक कारण आज तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, और एक आसान-सा कारण गिना देने से बेहतर है यह बात ईमानदारी से कह देना। डॉक्टर कई कारणों की ओर इशारा करते हैं, जो शायद मिलकर असर डालते हैं। यही वजह है कि अलग-अलग महिलाओं में पैरों की ऐंठन के कारण थोड़े अलग हो सकते हैं।

  • खून के बहाव में बदलाव और पैरों पर ज़ोर। बढ़ता हुआ गर्भाशय पेल्विस (कूल्हे) की बड़ी नसों और नाड़ियों पर दबाव डालता है, जिससे पैरों से खून की वापसी धीमी हो जाती है। वज़न बढ़ने और शरीर का संतुलन बदलने से पिंडली की मांसपेशियों पर ज़ोर बढ़ जाता है—शाम और रात तक ये थक जाती हैं और आसानी से अकड़ जाती हैं। इसीलिए कई महिलाओं को दिन ढलते-ढलते पैर भारी लगते हैं और पिंडलियों में दर्द भी होने लगता है।
  • मिनरल्स का संतुलन। मांसपेशियों के काम के लिए इलेक्ट्रोलाइट्स—कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम और सोडियम—ज़िम्मेदार होते हैं। प्रेगनेंसी में इनमें से कुछ की ज़रूरत बढ़ जाती है और शरीर में इनका स्तर बदल सकता है। ऐंठन का सीधा रिश्ता इन्हीं मिनरल्स की कमी से है—यह पूरी तरह साबित नहीं हुआ, पर इनका संतुलन भूमिका ज़रूर निभाता है।
  • पानी की कमी (डिहाइड्रेशन)। जब शरीर में पानी कम होता है, तो मांसपेशियाँ ज़्यादा आसानी से अकड़ती हैं। गर्मी में, मॉर्निंग सिकनेस (उल्टी-मतली) के दौरान, या अगर आप बस कम पानी पीती हैं, तो ऐंठन का खतरा बढ़ जाता है।
  • थकान और मांसपेशियों पर अतिरिक्त खिंचाव। देर तक खड़े रहना, आदत से ज़्यादा हलचल, या इसके उलट पूरे दिन की सुस्ती—ये सब रात की ऐंठन की वजह बन सकते हैं।

पैरों में ऐंठन सबसे ज़्यादा कब होती है

आम तौर पर पैरों की ऐंठन दूसरी और तीसरी तिमाही में बढ़ जाती है और रात में या तड़के सुबह परेशान करती है। यह एक आम शिकायत है: होने वाली कई माओं को यह होती है, और अपने आप में ऐसी ऐंठन इस बात का संकेत नहीं कि प्रेगनेंसी में कुछ गड़बड़ है।

पैर में ऐंठन आ जाए तो क्या करें: ऐंठन से तुरंत राहत

ऐंठन के समय सबसे ज़रूरी काम है—अकड़ी हुई मांसपेशी को धीरे-धीरे खींचकर ढीला करना। जब पैरों में ऐंठन अचानक पकड़ ले, तो घर पर तुरंत यह करें:

  • पंजे को अपनी ओर खींचें। घुटने से पैर सीधा करें और पंजे व उंगलियों को ऊपर, पिंडली की तरफ़ खींचें। इससे पिंडली की मांसपेशी खिंचती है और ऐंठन आम तौर पर सबसे जल्दी छूटती है। पंजे को आगे की ओर न खींचें—इससे ऐंठन और बढ़ सकती है।
  • उस पैर पर खड़ी हों। अगर हो सके तो धीरे से खड़ी होकर अपना वज़न उसी पैर पर डालें जिसमें ऐंठन है, और एड़ी को हल्का-सा ज़मीन में दबाएँ।
  • पिंडली की मालिश करें और सिकाई दें। हाथों से मांसपेशी को धीरे-धीरे दबाएँ, गुनगुनी सिकाई (हॉट वॉटर बैग) रखें या गुनगुने पानी से नहाएँ—गर्माहट मांसपेशी को ढीला करने में मदद करती है।
  • थोड़ा टहलें। जब तेज़ दर्द कम हो जाए, तो कमरे में धीरे-धीरे टहलें ताकि खून का बहाव फिर से सामान्य हो जाए।

तेज़ ऐंठन के बाद पिंडली कुछ घंटों तक हल्की दुखती रह सकती है—यह सामान्य है। लेकिन अगर दर्द जाता ही नहीं और मांसपेशी दबाने पर भी दर्द देती रहे, तो नीचे दिए चेतावनी के संकेतों पर ध्यान दें।

Pregnant woman sitting on the edge of a bed at night, flexing her foot toward her shin to relieve a calf cramp

रात में पैरों में ऐंठन को कैसे रोकें

ऐंठन से पूरी तरह बचना तो मुमकिन नहीं, पर रोज़मर्रा की कुछ आदतें इन्हें काफ़ी हद तक कम कर देती हैं। प्रेगनेंसी में रात की ऐंठन रोकने में ये बातें मदद करती हैं:

  • पर्याप्त पानी पिएँ। दिनभर थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहने से शरीर में पानी का संतुलन बना रहता है और मांसपेशियों के अकड़ने की आशंका घटती है।
  • सोने से पहले पिंडली की स्ट्रेचिंग करें। रात को कुछ मिनट की हल्की स्ट्रेचिंग से रात की ऐंठन साफ़ तौर पर कम होती है। एक आसान एक्सरसाइज़—दीवार की तरफ़ मुँह करके खड़ी हों, हाथ दीवार पर टिकाएँ, एक पैर सीधा रखते हुए पीछे ले जाएँ और एड़ी ज़मीन से उठाए बिना आगे की ओर तब तक झुकें जब तक पिंडली में हल्का खिंचाव महसूस न हो।
  • हल्की-फुल्की हलचल बनाए रखें। रोज़ाना धीमी सैर और हल्की गतिविधि पैरों में खून के बहाव को ठीक रखती है।
  • पंजे को आगे न तानें। चाहे बिस्तर पर हों या बैठी हों, पंजे को आगे की ओर खींचने से बचें। यह ऐंठन का एक आम 'ट्रिगर' है।
  • आरामदायक जूते-चप्पल पहनें। सहारा देने वाले, बिना ऊँची हील के टिकाऊ जूते-चप्पल पैरों की थकान कम करते हैं।
  • सोने की आरामदायक मुद्रा चुनें। करवट लेकर, घुटनों के बीच तकिया रखकर सोने से पेल्विस पर ज़ोर घटता है और पैरों से खून की वापसी बेहतर होती है; इस बारे में और जानने के लिए पढ़ें कि प्रेगनेंसी में किस करवट सोना चाहिए

खानपान भी ज़रूरी है: शरीर को पर्याप्त कैल्शियम और मैग्नीशियम चाहिए। इन्हें पाने का सबसे आसान तरीका है रोज़ का खाना—दूध-दही जैसे डेयरी उत्पाद, हरी सब्ज़ियाँ, मेवे (नट्स), दालें और साबुत अनाज। संतुलित आहार कैसे बनाएँ, यह हमने प्रेगनेंसी में क्या खाना चाहिए लेख में बताया है।

ऐंठन में मैग्नीशियम और कैल्शियम: क्या सप्लीमेंट ज़रूरी हैं

यहाँ ईमानदारी ज़रूरी है: प्रेगनेंसी में पैरों की ऐंठन पर मैग्नीशियम या कैल्शियम सप्लीमेंट के असर को लेकर वैज्ञानिक प्रमाण आपस में मेल नहीं खाते। Cochrane समेत कई व्यवस्थित समीक्षाओं में ऐसा पुख्ता सबूत नहीं मिला कि कोई एक सप्लीमेंट इस समस्या को पक्के तौर पर दूर कर देता है। इसलिए मैग्नीशियम, कैल्शियम या कोई भी दवा खुद से शुरू न करें। अगर ऐंठन बार-बार परेशान करती है, तो अपने डॉक्टर से बात करें—वे आपके खानपान और जाँच रिपोर्ट देखकर तय करेंगे कि आपको सप्लीमेंट की ज़रूरत है या नहीं और किस मात्रा में।

जब ऐंठन सिर्फ़ ऐंठन न हो: चेतावनी के संकेत

यह सबसे ज़रूरी हिस्सा है। आम ऐंठन अचानक आती है और स्ट्रेच करते ही उतनी ही जल्दी छूट भी जाती है। लेकिन कभी-कभी पैर का दर्द किसी ज़्यादा गंभीर दिक्कत का संकेत होता है। प्रेगनेंसी में खून के थक्के (clot) बनने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए सतर्क हो जाएँ अगर पिंडली का दर्द:

  • स्ट्रेच करने के बाद भी न जाए और मिनटों में छूटने के बजाय देर तक बना रहे;
  • सिर्फ़ एक पैर में हो;
  • उस जगह छूने पर सूजन, लाली, त्वचा का गरम होना या दर्द के साथ हो।

ऐसा मेल डीप वेन थ्रॉम्बोसिस (DVT)—यानी पैर की नस में खून का थक्का बनना—की ओर इशारा कर सकता है। यह एक इमरजेंसी है: इंतज़ार न करें, पैर की मालिश न करें, बल्कि फौरन डॉक्टरी मदद लें। पैरों के आम भारीपन और चिंताजनक संकेत में फ़र्क समझने के लिए यह जानना मददगार है कि प्रेगनेंसी में सूजन कैसी होती है और कब यह डॉक्टर को दिखाने की वजह बन जाती है।

एक बात अलग से: चेहरे और हाथों में अचानक तेज़ सूजन, खासकर सिरदर्द, धुंधला दिखना और पसलियों के नीचे दर्द के साथ, प्रीक्लेम्पसिया का संकेत हो सकती है—इसके लिए भी तुरंत डॉक्टरी जाँच ज़रूरी है। रात को होने वाली पिंडली की ऐंठन का अपने आप में प्रीक्लेम्पसिया से कोई लेना-देना नहीं, पर शरीर की कुल सूजन और अपनी तबीयत पर नज़र रखना ज़रूरी है।

डॉक्टर को ऐंठन के बारे में कब बताएँ

अगर बात ऊपर बताए इमरजेंसी संकेतों की नहीं है, तो घबराने की कोई बात नहीं—पर अपनी रूटीन जाँच (चेकअप) में ऐंठन का ज़िक्र तब ज़रूर करें, जब वे:

  • लगभग हर रात होती हों और नींद में खलल डालती हों;
  • बहुत तेज़ हो जाएँ या दिन में भी होने लगें;
  • पैर में साफ़ महसूस होने वाली कमज़ोरी, सुन्नपन या सनसनी में बदलाव के साथ हों।

डॉक्टर आपके मामले में पैरों में ऐंठन के कारण समझने में मदद करेंगे, यह देखेंगे कि आपके खानपान में सब कुछ पूरा है या नहीं, और आगे क्या करना है यह बताएँगे।

प्रेगनेंसी में पैरों की ऐंठन: खास बातें

  • पिंडली की मांसपेशियों में रात की ऐंठन दूसरी-तीसरी तिमाही में बहुत आम है और आम तौर पर सुरक्षित होती है।
  • इसका सटीक कारण तय नहीं है; संभवतः पैरों पर ज़ोर, खून का बहाव, मिनरल्स का संतुलन और पानी की कमी—सब भूमिका निभाते हैं।
  • ऐंठन छुड़ाने के लिए पंजे को अपनी ओर खींचें, पैर सीधा करें, पिंडली की मालिश व सिकाई करें, फिर थोड़ा टहलें।
  • बचाव के लिए पानी पीना, रात को पिंडली की स्ट्रेचिंग, हलचल, आरामदायक जूते-चप्पल और संतुलित खानपान मदद करते हैं; सप्लीमेंट सिर्फ़ डॉक्टर की सलाह पर लें।
  • फौरन डॉक्टर के पास जाएँ—अगर एक ही पिंडली का दर्द न जाए और साथ में सूजन, लाली, गरमाहट या छूने पर दर्द हो (थक्के यानी क्लॉट का खतरा)।

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और किसी डॉक्टर की व्यक्तिगत सलाह की जगह नहीं ले सकता। तेज़, बार-बार होने वाले या असामान्य लक्षण होने पर अपने स्त्री रोग विशेषज्ञ (गायनोकोलॉजिस्ट) या उस डॉक्टर से संपर्क करें जो आपकी प्रेगनेंसी देख रहे हैं।

AI की सहायता से बनाया गया और Mama Ai टीम द्वारा समीक्षित। शैक्षिक जानकारी — यह पेशेवर चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है।

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